दादी मेरी - दादी मेरी,
बहुत प्यार करती थी हमको!
रोज सुबह-सुबह जगाकर,
सैर कराती थी हमको !!
कभी नहीं डाटती हमको,
खूब प्यार जताती थी !
घर में सब लोगों को,
प्यार से समझाती थीं !!
विषम परिस्थितियों में भी,
हिम्मत बहुत बढाती थीं !
कभी न हिम्मत हारो तुम,
ऐसा पाठ पढ़ाती थीं !!
(समर्पित दादी माँ)
वित्तीय समावेशन, डिजिटल नवाचार से ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स तक, भारतीय डाक सुदूर
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अग्र...
2 दिन पहले