शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

दादी का प्यार

दादी मेरी - दादी मेरी,
बहुत प्यार करती थी हमको!
रोज सुबह-सुबह जगाकर,
सैर कराती थी हमको !!

कभी नहीं डाटती हमको,
खूब प्यार जताती थी !
घर में सब लोगों को,
प्यार से समझाती थीं !!

विषम परिस्थितियों में भी,
हिम्मत बहुत बढाती थीं !
कभी न हिम्मत हारो तुम,
ऐसा पाठ पढ़ाती थीं !!


(समर्पित दादी माँ)

4 टिप्‍पणियां:

Suman ने कहा…

nice

कविता रावत ने कहा…

Dadi Maa ko samarpit rachna bahut achhi lagi....
Dadi bachhon ko sabse achhi lagti hai..
Bahut shubhkamnayne... Lambi umra ho aapki Dadi ki yahi shubhkamna hai...

raghav ने कहा…

sharad ji aap ne dadi maa per ek sunder si kavita lekhi.bhaut achhi lagi

शरद कोकास ने कहा…

वाह शरद भाई मुझे भी अपनी दादी की याद आ गई ।