दादी मेरी - दादी मेरी,
बहुत प्यार करती थी हमको!
रोज सुबह-सुबह जगाकर,
सैर कराती थी हमको !!
कभी नहीं डाटती हमको,
खूब प्यार जताती थी !
घर में सब लोगों को,
प्यार से समझाती थीं !!
विषम परिस्थितियों में भी,
हिम्मत बहुत बढाती थीं !
कभी न हिम्मत हारो तुम,
ऐसा पाठ पढ़ाती थीं !!
(समर्पित दादी माँ)
IIM Ahmedabad Post Office inaugurated at N-GEN (Next GEN) themed, revamped
Post Office in Gujarat
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भारतीय डाक डिजिटल सोच, आधुनिक सुविधाएँ और युवा ऊर्जा के साथ नए भारत की
रफ्तार में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। पारंपरिक डाक सेवाओं से आगे
बढ़ते हुए ...
3 दिन पहले
3 टिप्पणियां:
Dadi Maa ko samarpit rachna bahut achhi lagi....
Dadi bachhon ko sabse achhi lagti hai..
Bahut shubhkamnayne... Lambi umra ho aapki Dadi ki yahi shubhkamna hai...
sharad ji aap ne dadi maa per ek sunder si kavita lekhi.bhaut achhi lagi
वाह शरद भाई मुझे भी अपनी दादी की याद आ गई ।
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